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मेरी कलम से: जिंदगी एक सफर है सुहाना...

Monday, April 9, 2012

जिंदगी एक सफर है सुहाना...



मौत आनी है आएगी एक दिन, जान जानी है जाएगी एक दिन। ऎसी बातों से क्या घबराना, यहां कल क्या हो किसने जाना......जिंदगी और मौत दोनों को ही समान रूप से देखने वाले हसरत जयपुरी की जिंदगी के प्रति फलसफा उनकी रचित इन्हीं पंक्तियों में समाया हुआ है।

मुशायरों और महफिलों में मिली बेपनाह कामयाबी ने बतौर बस कंडक्टर अपने करियर की शुरूआत करने वाले इकबाल हुसैन को फिल्म जगत का अजीम शायर और गीतकार हसरत जयपुरी के रूप में स्थापित कर दिया जिन्होंने लगभग तीन दशकों तक अपने रचित गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। 15 अप्रैल 1918 को जयपुर शहर में जन्में हसरत जयपुरी ने बारहवीं तक की शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में पूरी की। इसके बाद वह अपने दादा फिदा हुसैन से उर्दू और फारसी की तालीम लेने लगे।

बीस वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उनका झुकाव शेरो-शायरी की तरफ होने लगा और इसके बाद वह छोटी छोटी कविताएं लिखने लगे। वर्ष 1940 में अपने सपनों को नया रूप देने के लिए हसरत जयपुरी मुंबई पहुंचे जहां उन्होंने बस कंडक्टर के रूप में अपने व्यवसायिक जीवन की शुरूआत की। इस काम के लिए उन्हें मात्र 11 रूपए प्रति माह वेतन के रूप मे मिला करता था। इस बीच उन्होंने मुशायरें के कार्यक्रम में भी भाग लेना शुरू किया जहां उन्हे काफी शोहरत मिलने लगी।

मुशायरे के एक कार्यक्रम मे पृथ्वी राज कपूर उनके गीत को सुनकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अपने पुत्र राजकपूर को हसरत जयपुरी से मिलने की सलाह दी। राजकपूर उन दिनों अपनी फिल्म बरसात के लिए गीतकार की तलाश कर रहे थे। उन्होंने हसरत जयपुरी को मिलने का न्योता भेजा। इसे महज एक संयोग ही कहा जायेगा कि फिल्म बरसात से ही संगीतकार शंकर जयकिशन ने भी अपने सिने कैरियर की शुरूआत की थी।

राजकपूर के कहने पर शंकर जयकिशन ने हसरत जयपुरी को एक धुन सुनाई और उसपर उनसे गीत लिखने को कहा। धुन के बोल कुछ इस प्रकार थे- "अंबुआ का पेड़ है वहीं मुंडेर है आजा मेरे बालमा काहे की देर है" शंकर जयकिशन की इस धुन को सुनकर हसरत जयपुरी ने गीत लिखा "जिया बेकरार है छाई बहार है आजा मेरे बालमा तेरा इंतजार है"। वर्ष 1949 प्रदर्शित फिल्म बरसात में अपने इस गीम की कामयाबी के बाद हसरत जयपुरी रातोंरात बतौर गीतकार अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए।

फिल्म बरसात की कामयाबी के बाद राजकपूर, हसरत जयपुरी और शंकर जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मों मे एक साथ काम किया। इनमें आवारा, श्री 420, चोरी चोरी, अनाड़ी, जिस देश में गंगा बहती है, संगम, तीसरी कसम, दीवाना, एराउंड द वर्ल्ड, मेरा नाम जोकर, कल आज और कल जैसी फिल्में शामिल है।

शंकर जयकिशन की जोड़ी प्रसिद्ध गीतकार हसरत जयपुरी के साथ भी खूब जमी। इस जोड़ी के गीतों में शामिल कुछ गीत हैं- छोड़ गए बालम मुझे हाय अकेला , हम तुमसे मोहब्बत करके सनम, इचक दाना बिचक दाना, आजा सनम मधुर चांदनी में हम, जांउ कहा बता ये दिल, एहसान तेरा होगा मुझपे, तेरी प्यारी प्यारी सूरत को, तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूं, बहारों फूल बरसाओं मेरा महबूब आया है, दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, कौन है जो सपनो मे आया, जाने कहां गये वो दिन और जिंदगी एक सफर है सुहाना।

यूं तो हसरत जयपुरी फिल्मों के लिए हर तरह के गीत लिखने में सक्षम थे लेकिन उनकी पसंद की बात की जाए तो उन्हें फिल्मों के शीर्षक पर गीत लिखने में महारत हासिल थी। फिल्मो के लिए शीर्षक पर लिखना उन दिनों काफी बड़ी बात समझी जाती थी। हसरत जयपुरी ने कई फिल्मों के लिए शीर्षक गीत लिखकर उन फिल्मों को सफल बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हसरत जयपुरी को दो बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें अपना पहला फिल्म फेयर पुरस्कार वर्ष 1966 में फिल्म सूरज के गीत "बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है" के लिए दिया गया था। वर्ष 1971 में फिल्म अंदाज मे "जिंदगी एक सफर है सुहाना" गीत के लिए भी हसरत जयपुरी सर्वश्रेष्ठ गीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

तीन दशक लंबे अपने सिने कैरियर में 300 से अधिक फिल्मों के लिए लिखे लगभग 2000 गीतों के साथ गीत संगीत की दुनिया में बेजोड़ मुकाम हासिल करने वाला यह महान शायर और गीतकार 17 सिंतबर 1999 को इस दुनिया से रूखसत हो गया

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